स्वामी विवेकानंद मेडिकल मिशन, वायनाड

Published: Friday, Aug 19,2011, 12:29 IST
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स्वामी विवेकानंद, विवेकानंद नगर, कालपेट्टा दक्षिण, जिला : वायनाड

केरल प्रांत के वायनाड जिले के अविकसित, पहाडी, वनवासी क्षेत्र मे आदिम समाज की १८ जनजातियॉं, खासतर कट्टुनैका जाती के लोक यहा रहते है| जमीन खरीदना, बेचना ये सब व्यापार इन भोले-भाले लोगों को जरा भी ज्ञात नही थे| इसका परिणाम की, इनकी भूमि अन्य लोगों ने हडप ली| वे गरीब, उपेक्षित हो गये| अपनी जमीन होते हुए भी वे उसपर फँसल नही उगा पाते थे| फलत: इस हालात से वे अब कभी भी बाहर नही निकल पाएंगे ये सोचकर उनका जीवन और भी कठिन हो गया| इन उपेक्षित लोगों की मदत करके उन्हे इस अवस्था से बाहर निकालना यह स्वामी विवेकानंद मेडिकल मिशन प्रकल्प का प्रथम उद्देश्य बन गया और उस दिशा से मिशन के कार्यकर्ताओंने अपना काम शुरू कर दिया| अब इन वनवासीओं का जीवन और भी सरल और सहज हो गया|

स्वामी विवेकानंद मेडिकल मिशन प्रकल्प की स्थापना १९७२ मे हुई| मिशन के कार्यकर्ताओंने इन भोले-भाले लोगों को व्यापार की दृष्टीसे प्रशिक्षित किया, अपने हक्क के विरुद्ध लढने के लिए साहस दिलाया, उनके मनमे जीने के लिए आत्मविश्‍वास जताया| इसके साथ-साथ उनके स्वास्थ को ध्यान मे रखते हुए मुत्तिल गॉंव मे निशुल्क चिकित्सा केंद्र खोलकर मिशन के कार्य को प्रारंभ किया गया|

अब यहॉं एक ३० शय्याका (बेड्स) और कई उपकरणों से युक्त अस्पताल चलाया जाता है| तीन पूर्णकालिक निवासी वैद्यकीय  अधिकारी, बार-बार भेंट देने वाले दस विशेषज्ञ, १५ अवैद्यकीय, दस  सहायक एवं कई सेवाभारती के कार्यकर्ता यहॉं कार्यरत है| अधिकांश कार्यकर्ता वनवासी क्षेत्र के है| उन्हे यथोचित प्रशिक्षण देकर सक्षम किया जाता है| १९७३ मे केवल ५,३२१ रुग्णों पर उपचार किए गए थे| वही २००२ मे ८,९६७ रुग्णों की सेवा की गई| सन १९८० में रा. स्व. संघ के तृतीय सरसंघचालक बालासाहब देवरसजी ने नागपुर के सेवाव्रती डॉ. डी. डी. सगदेव जी को इस अस्पताल में विशेषरूप से भेजने के बाद इस अस्पताल का विविधांगी विकास गती से हुआ|

इसके बावजूद मिशनद्वारा और भी विविध उपक्रम चलाए जाते है|

१. सिकल सेल ऍनिमिया : यहॉं के वनवासी लोगों में  सिकल सेल ऍनिमिया यह जानलेवा बीमारी अधिक मात्रा में दिखाई देती है| ऐसा ज्ञात होने पर, दिल्ली की अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्था (एम्स) के सहयोग से मिशन ने एक प्रकल्प तयार किया, जिसमें लगभग समस्त वनवासी बंधुओं का विधिवत् परीक्षण किया गया| इसमें जो रुग्ण पाए गए उनकी चिकित्सा, सलाह तथा अनुवर्ति देखभाल (फालो-अप) की व्यवस्था की गई है|

२. सिकल सेल बीमारी के सिवा इन वनवासीयों में क्षयरोग भी ज्यादा फैला हुआ नजर आया| संस्था को क्षयरोग (ट्युबरक्युलोसिस) नियंत्रण कार्यक्रम में भारत सरकार के राष्ट्रीय क्षयरोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत निरीक्षक (मॉनिटर) का दायित्व सौंपा गया है| संस्था को उसके प्रभावी कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान करके सन्मानित भी किया गया है|

३. कोझीकोड (कालिकट) के वैद्यकीय महाविद्यालय के सहयोग से कर्करुग्णों के (कॅन्सर पेशन्ट्स) लिए दु:खशामक/निवारक स्वास्थ्य चिकित्सा केंद्र चलाया जाता है| इस केंद्र के माध्यम से कुछ रुग्णों के घर में जाकर भी उपचार करने की व्यवस्था की जाती है|

४. चल चिकित्सालय के माध्यम से रुग्णों के बस्ती में उपचार करने की व्यवस्था की गई है| इसके अलावा चल चिकित्सालय, शिशु व प्राथमिक विद्यालय तथा वनवासी छात्रावासों के सभी छात्रों का समय-समय पर वैद्यकीय परीक्षण करता है| चार वनवासी बहुल स्थानों पर वैद्यकीय उपकेंद्र खोले गए है| यहॉं सप्ताह मे एक बार रोगनिदान तथा रुग्णोपचार किए जाते हैं| २००२ में ही वायनाड जिले के विभिन्न स्थानों में ४३० स्वास्थ्य चिकित्सा शिबिर लगाए गए| गंभीर अवस्था के रुग्णों को संस्था अपनी व्यवस्था से तुरंत मुत्तिल के अस्पताल पहुँचा कर उपचार करती है|

५) स्वास्थ्य मित्र : ‘सभी के लिए स्वास्थ्य सेवा’ कार्यक्रम अंतर्गत यह उपक्रम चलाया जाता है| अब तक १५० वनवासी कार्यकर्ताओं को मिशन ने प्रशिक्षित किया है| स्वास्थ मित्र उनके अपने प्रस्तावित कार्यक्षेत्र में नियमित प्रवास करते है| गॉंव के रुग्णों को प्राथमिक उपचार पहुँचाना तथा दृक्श्राव्य माध्यमों, साहित्य, छायाचित्र इत्यादि के प्रयोग से स्वास्थ्य शिक्षा देना यह स्वास्थ्य मित्रों का दायित्व है|

६) सामाजिक सेवाकार्य/शिक्षाकार्य : मिशन के द्वारा ६ ग्रामीण विद्यालय, १५ बाल संस्कार केंद्र, ११ ग्राम सेवा समितियॉं संचालित की जाती है| दो गॉंवो मे पेयजल का प्रबंध तथा अन्य दो गॉंवो मे स्वच्छता गृहों का निर्माण भी किया गया है|

७) सिलाई प्रशिक्षण केंद्र चलाकर अब तक ६० महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है|

८) सिकल सेल ऍनिमिया व्याधि से ग्रस्त रुग्ण अत्यंत दुर्बल हो जाते हैं| उनके आर्थिक पुनर्वसन के लिए दो प्रशिक्षण केंद्र चलाए जाते हैं; जिसमे बॉंस एवम् बेंत की वस्तुएँ तैयार की जाती है| कुल ९० रुग्ण इसका लाभ उठाते हैं|

१९९६ में स्वामी विवेकांनद मेडिकल मिशन को ‘‘श्री गुरुजी पुरस्कार’’ देकर सम्मानित किया गया था|

संपर्क :

स्वामी विवेकानंद मेडिकल मिशन
विवेकानंद नगर, मुत्तिल
पोस्ट : कालपेट्टा दक्षिण, जिला : वायनाड
पिन : ६७३१२२ (केरल, भारत)
दूरभाष : ०४९३६ २०२५२८, २०४३६०
ई-मेल : svmm_muttil@hotmail.com
वेब साईट : www.svmm.org

कैसे पहुँचे :

हवाई मार्ग : वायनाड से समीपतम हवाई अड्डा कोझीकोड का कारिपुर हैं| वह वायनाड से १०० कि.मी. दूरीपर हैं| भारत के सभी प्रमुख शहरों से यहॉं हवाई सेवाएँ उपलब्ध है| वायनाड से २६५ कि.मी. दूर कोचिन आंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा हैं|
रेल मार्ग : वायनाड से ११० कि.मी. दूर कोझीकोड यह समीपतम रेल्वे स्टेशन हैं| भारत के सभी प्रमुख शहरों से यह स्टेशन रेल गाडीयों से जुडा हैं|
सडक मार्ग : वायनाड सें मुत्तिल २१ कि.मी. दूर हैं| वायनाड सभी प्रकार के सडक मार्ग से विविध शहरों से जुडा हैं| विशेषत: राष्ट्रीय महामार्ग नं. २१२ और राज्य महामार्ग १७ से हम सुलभता से वायनाड पहुँच सकते है| बंगलोर से भी वायनाड के लिए बस सेवा उपलब्ध है|

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