डा. स्वामी की भ्रष्टाचार विरोधी समिति, एक परिचय

Published: Wednesday, Feb 08,2012, 11:01 IST
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अनुभवी और जुझारू लोगो का समूह है सुब्रमण्यम स्वामी जी का संगठन (ACACI) Action Committee against Corruption of India के सदस्यों के तौर पर ऐसे व्यक्तियों को शामिल किया गया है जिनके अनुभव और जुझारूपन का पूरे देश में लोहा माना जाता है आइये एक नज़र डालते है इन अनुभवी सदस्यों के संक्षिप्त परिचय पर ...

डॉ सुब्रमण्यम स्वामी : जनता पार्टी के अध्यक्ष डॉ सुब्रमण्यम स्वामी इस नए संगठन के अध्यक्ष हैं| भारत में प्रख्यात अर्थशास्त्री के रूप में प्रसिद्ध डॉ स्वामी पूर्व केंद्रीय कानून एवं वाणिज्य मंत्री, पांच बार सांसद, योजना आयोग के सदस्य एवं हार्वर्ड में अर्थशास्त्र के प्रोफ़ेसर रह चुके है| इन्होने भारत-चीन, भारत-पाकिस्तान और भारत-इजरायल संबंधो पर गहन अध्ययन किया है| डॉ. स्वामी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने में हमेशा से अग्रसर रहे है|

के. एन. गोविन्दाचार्य : राजनितिक विचारक और समाजसेवी गोविन्दाचार्य वर्तमान समय में राष्ट्रीय स्वाभिमान आन्दोलन, भारत विकास संगम और कौटिलय शोध संस्थान के संरक्षक हैं| इन्होने राजनितिक, समाज, अर्थव्यवस्था और संस्कृति पर वैश्वीकरण के प्रभाव का गहन अध्ययन किया है| गोविन्दाचार्य जी की अध्यक्षता में राष्ट्रीय स्वाभिमान आन्दोलन ने २००८ में विदेशो में जमा काले धन को लेकर देशव्यापी आन्दोलन किया था|

एस. गुरुमूर्ति : पेशे से चार्टेड एकाउंटेंट स्वामीनाथन गुरुमूर्ति, भारत के प्रसिद्ध पत्रकार एवं कारपोरेट सलाहकार है| खोजी पत्रकारिता के लिए प्रसिद्ध गुरुमूर्ति ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाते हुए, बोफोर्स घोटाले और सरकार व कारपोरेट जगत के बीच सांठगांठ पर से पर्दा उठाया| इन्हें १९९० में ‘जेंटलमेन’ पत्रिका द्वारा भारत के ५० सबसे अधिक शक्तिशाली व्यक्तियों की सूची में शामिल किया था| वहीं २००४ मे ‘बिजनेस बैरन” द्वारा जारी सबसे अधिक शक्तिशाली व्यक्तियों की सूची मे ८वां स्थान मिला|

अजित डोभाल : भारत के प्रसिद्ध आईपीएस अधिकारी अजित कुमार डोभाल ख़ुफ़िया ब्यूरो के पूर्व निदेशक रह चुके है| कीर्ति चक्र से सम्मानित होने वाले वे भारत के पहले पुलिस अधिकारी है| इन्होने लन्दन और पाकिस्तान मे भी कार्य किया है| विद्रोह की स्थिति से निपटने मे विशेषज्ञ डोभाल जी भारतीय नीतिकारों और सरकारी एजेंसियों के सलाहकार रह चुके है| सरकारी सेवा से निवृत्त होने के बाद अब डोभाल जी विवेकानंद अंतरराष्ट्रीय संस्था का संचालन कर रहे है|

प्रो. माधव दास नलपत : मुंबई विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र मेन गोल्ड मेडलिस्ट प्रो. माधव दास वर्त्तमान मे मणिपाल विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ जियोपोलिटिक्स के निदेशक है| प्रो. माधव दास ने १९८३ में भारत-चीन-रूस गठबंधन, १९९२ में वहाबिजम् से खतरा, १९९५ में हिंदू, मुस्लिम व ईसाइयों की एकता के रूप मे ‘इन्दुत्व’, १९९९ में प्रोक्सी न्यूकिलयर स्टेट, २००२ में ‘एशियन नाटो’ की अवधारणा से देश को अवगत कराया|

डॉ. आर. वैधनाथन : डॉ. आर. वैधनाथन आईआईऍम बेंगलुरु में फाइनेंस के प्रोफ़ेसर है| डॉ. वैधनाथन जी पूंजी पर टेक्निकल सलाहकार समिति, विदेशी विनिमय एवं सरकारी प्रतिभूति बाज़ार और रिजर्व बैंक की भारतीय अर्थव्यवस्था पर सलाहकार समिति के सदस्य रह चुके है| विदेशो में जमा काले धन लगभग एक दशक से गहन अध्ययनशील है और धन वापिसी की रूप रेखा पर कार्यरत है|

ए. सूर्य प्रकाश : भारत के प्रख्यात पत्रकार ए. सूर्य प्रकाश भारतीय राजनीति, संबैधानिक व संसदीय मुद्दों के टिपण्णीकार रहे है| ए. सूर्य प्रकाश जी ने “What Else India Parliament’ नाम से एक पुस्तक भी लिखी है और विवेकानंद अंतरराष्ट्रीय संस्था के वरिष्ठ सदस्य है|

डॉ. एस. कल्याणरमण : डॉ. एस. कल्याणरमण सरस्वती रिसर्च सेंटर के निदेशक, रामसेतु रक्षा आन्दोलन के अध्यक्ष और वर्ल्ड एसोसिएशन फॉर वैदिक स्टडीज के निदेशक मंडल के सदस्य है| यूनीवर्सिटी ऑफ द फिलीपींस से लोक प्रशासन मेन पीएचडी करने वाले डॉ. कल्याणरमण एशियन डेवलेपमेंट बैंक के वरिष्ठ और भारतीय रेलवे में आर्थिक सलाहकार रह चुके है|

वी. सुंदरम : सेवानिवृत्त आई.ए.एस अधिकारी वी. सुंदरम ने तमिलनाडु सरकार में विभिन्न पदों पर कार्य किया है और वर्त्तमान में जनता पार्टी के अखिल भारतीय महासचिव के तौर पर कार्य कर रहे है|

एम. आर. वेंकटेश : चार्टेड एकाउंटेंट एम. आर. वेंकटेश अर्थशास्त्र की नीतियों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और व्यावसायिक नीतियों के विशेषज्ञ है| “Global Imbalances And The Impending Dolor Crisis” और “ Sens, Sensex and Sentiments” पुस्तकों के लेखक वेंकटेश ने काले धन के मुद्दे पर सतत आन्दोलन में पूर्ण भागीदरी और रूपरेखा की जिम्मेदारी निभाई है|

जे. गोपीकृष्ण : पायनियर के विशेष संवाददाता गोपीकृष्ण ने ही २जी स्पेक्ट्रम मामले को प्रकाश में लाया था और साथ ही नीरा राडिया प्रकरण पर से भी पर्दा उठाया था|

के. संपत आयंगर : प्रख्यात आयकर वकील और चार्टेड एकाउंटेंट आयंगर कारपोरेट फाइनेंस, करप्रणाली और बजटीय नियंत्रण के विशेषज्ञ है| वह कई भारतीय कारपोरेट घरानों के लेखा परीक्षक और सलाहकार रहे है|

सरजू राय : झारखण्ड और बिहार में सामाजिक-राजनितिक क्षेत्र में सरजू राय काफी प्रसिद्ध है| वे बिहार विधान परिषद और झारखण्ड विधान परिषद के सदस्य रह चुके है| इन्होने चारा घोटाले, मधु कोड़ा खान घोटाले और बड़ोदा बैंक घोटाले को उजागर किया है| इनके प्रयासों से कोई भ्रष्ट राजनेता जेल की हवा खा चुके है|

अभिषेक जोशी : ACACI के सचिव के रूप मेन कार्यरत अभिषेक पेशे से प्रबंधन सलाहकार है| सामाजिक- राजनितिक कार्यकर्ता के रूप में अभिषेक जोशी ने कम समय में ही अपनी एक अलग पहचान बनाई है| इन्होने अंतरराष्ट्रीय कानून, संबैधानिक व राजनितिक सुधार, प्रशासन का विकेन्द्रीयकरण, भू-राजनितिक रणनीति और विदेशनीति का गहन अध्ययन किया है|

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