आदरणीय अन्ना, जवाब दीजिए: दिग्विजय सिंह का खुला पत्र

Published: Tuesday, Oct 11,2011, 19:59 IST
Source:
0
Share
रालेगांव सिद्धि, अन्ना, दिग्विजय सिंह, मध्य प्रदेश, अरविंद केजरीवाल, सोनिया गांधी, Sonia Gandhi, Anna Hazare, IAC, Madhya Pradesh CM, Digvijay Singh

मुझे आपको यह खुला पत्र लिखते हुए बड़ा खेद हो रहा है। मैं आपका बहुत सम्मान करता हूं। यह भावना आज से नहीं है किन्तु उस समय से है जब मैं आपके गांव रालेगांव सिद्धि आया था। जल ग्रहण शिक्षा, पर्यावरण रक्षा और नशाबंदी के काम देख कर मैं बहुत प्रभावित हुआ था। मुझे आज भी आपके नशाबंदी, कुल्हाण बंदी, चराईबंदी तथा नसबंदी के नारे याद हैं।

आपके विषय में एक आदर और सम्मान का भाव बना था। इसी भावना और अनुभव के आधार पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में मैंने आपको राज्य योजना बोर्ड का सदस्य बनने के लिए आमंत्रित किया। आप मध्य प्रदेश आए और कई गांव जा कर आपने पानी रोको के काम का मार्गदर्शन भी किया। उस समय भी आदर पूर्वक आपके चरण स्पर्श कर मैं आशीर्वाद प्राप्त करता था और आज भी वही सम्मान यथावत है।

पर हाल की कुछ घटनाओं ने मुझे असमंजस में डाल दिया है। ऐसा लगता है कि आपको कुछ लोगों ने घेर लिया है। यह वो लोग हैं जो हमेशा से कांग्रेस की विचारधारा के विरोधी रहे हैं। फिर चाहे श्री शांति भूषण हों या उनके सुपुत्र प्रशांत या आपके साथी अरविंद केजरीवाल।

यह सभी लोग कांग्रेस विरोधी रहे हैं। यह अपना राजनैतिक स्वार्थ सिद्ध करने में लगे हुए हैं और इस काम के लिये आपके साफ सुथरे चरित्र का दोहन कर रहे हैं। इनके प्रभाव में ही आप कई एक तरफा निर्णय कर रहे हैं और इस का परिणाम यह हो रहा है कि आप कई ऐसे कदम उठा रहे हैं जो आज तक के आपके जीवन मूल्यों के विपरीत है।

आपने भ्रष्रटाचार के मुद्दे को बड़े प्रभावी ढंग से उठाया है। और इस विषय पर पूरे देश में कोई विवाद नहीं है कि भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। आपका आंदोलन शुरू होने से पहले ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी जी ने पहल करके बुराड़ी के कांग्रेस अधिवेशन में भ्रष्टाचार के खिलाफ पांच सूत्रीय कार्यक्रम की घोषणा की थी। इसी को लागू करने के लिए उन्होंने राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के दो सदस्यों- अरुणा रॉय और हर्ष मंदर को एक लोकपाल बिल का प्रारूप बनाने का काम सौंपा था।

यह दोनों उसी सिविल सोसाइटी के प्रमुख सदस्य हैं जिसका और आपके साथी समर्थन करते हैं। आपको और आपके साथियों को भ्रष्टाचार के विषय में कांग्रेस और अन्य दलों के भीतर फर्क करना चाहिए। आपको यह स्वीकार करना चाहिए कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की पहल पर ही इस देश में सूचना का अधिकार लागू हुआ है इसके बाद भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आए हैं।

इसके विपरीत आप भाजपा के शासनकाल को याद कीजिए। उनके अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण टीवी पर पैसे लेते हुए देखे गए? जब जेटली रक्षा मंत्री के घर रक्षा सौदे करते हुए देखे गए फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। भाजपा के सांसद टीवी पर पैसे लेते हुए देखे गए और उन पर कोई भी केस दर्ज नहीं हुआ। आपने स्वामी रामदेव के आंदोलन का समर्थन किया और वह भी बडे़ जोरशोर से कालेधन के खिलाफ अभियान चला रहे थे। पर आज उन पर व उनके करीबी साथियों को प्रवर्तन निदेशालय ने काला धन अर्जित करन के नोटिस दिए हैं। क्या इन सब बातों से आपकी छवि धूमिल नहीं होती?

आज काले धन को लेकर बीजेपी के नेता बयानबाजी करते हैं। पर अपने शासनकाल में इन्होंने कुछ भी नहीं किया। उस समय आप भी खामोश रहे। आपने कभी भी भाजपा के नेताओं के खिलाफ आवाज नहीं उठाई। आप जितना जोश आज कांग्रेस के खिलाफ दिखाते हैं उसकी तुलना में भाजपा के नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हैं। जबकि गुजरात में नौ साल से लोकायुक्त नहीं है।

आप यह भी सोचिए कि जब आपने लोकपाल कानून के लिए आंदोलन किया तो सरकार ने जो पहल की वो हमारे देश के इतिहास में आज तक नहीं हुई। किसी भी कानून को तैयार करने के लिए गैरसरकारी सदस्यों के साथ मंत्रियों की भी संयुक्त समिति नहीं बनाई गई है और इतना ही नहीं उसके अधिकाशं सुझाव भी मान लिए गए हैं। आप भी जानते हैं कि विवाद केवल प्रधानमंत्री और न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे में रखने को लेकर और कुछ ऐसी बातों को लेकर था, जिनके लिए संविधान संशोधन भी जरूरी हो सकते हैं।

यदि सामान्य रूप से देखा जाए तो यह कोई इतना गंभीर विषय नहीं था कि इसके लिए आमरण अनशन किया जाए। क्योंकि आपकी मूल मांग तो सरकार ने मान ही ली थी। इसके बाद भी जब आप अनशन पर बैठे तो सरकार ने फिर पहल करके संसद के दोनों सदनों में चर्चा कराके आप के द्वारा रखे गए तीन मुद्दों पर आम सहमति बनाकर आपको संतुष्ट किया।

आपने इस पहल से संतुष्ट होकर अपना अनशन समाप्त किया। उस समय अपनी जीत का ऐलान करते हुआ आपने यह भी कहा कि सरकार झुक गई है। इस जीत का जश्न मनाया गया और हम लोगों को उम्मीद थी कि आप इस जीत के माध्यम से जनता को कम से कम यह संदेश तो देते कि सरकार ने भ्रष्टाचार के विरोध में आपकी बातों को मान लिया है।

इस काम को पूरा करने के लिए संसद ने शीतकालीन सत्र तक ही समय सीमा तय हुई। आप भी जानते हैं कि प्रक्रिया अभी चल रही है और यह समयसीमा अभी पूरी नहीं हुआ है। यह सारा मामला अभी संसद की संयुक्त स्थायी समिति के पास है और आपके लोग इस समिति के सामने पेश ही हो चुके हैं। फिर भी आप कांग्रेस के विरोध में एकतरफा फैसले ले रहे हैं।

मुझे नहीं लगता कि किसी भी संसदीय व्यवस्था में इससे अधिक कुछ किया ज सकता है। सरकार और कांग्रेस पार्टी ने अपनी पूरी ईमानदारी के साथ लोकपाल कानून बनाने का वादा किया है और जब पूरी संसद ने इसका समर्थन किया तो फिर आपको इस बात पर अविश्वास करने का कारण नहीं है। फिर भी आपने कांग्रेस के खिलाफ वोट करने का आह्वान किया है।

यहा मुझे आपका ध्यान कुछ बातों की तरफ दिलाना है। आप और आपके साथी राजनीति में सक्रिय हों और कांग्रेस या किसी भी दल का विरोध करें यह आपका मौलिक अधिकार है। इसमें मुझे या कांग्रेस पार्टी को कोई आपत्ति होने का सवाल नहीं खड़ा होता।

वास्तव में यह तो अच्छी बात है कि आप जैसे साफ सुधरे लोग राजनीति में आएं। किंतु राजनीति में आप यदि इस आधार पर आ रहे हैं कि कांग्रेस का इसलिए विरोध होना चाहिए क्योंकि यह लोकपाल कानून के खिलाफ है तो यह बात ही गलत धारणा पर आधारित है।

दूसरे आपको यह भी विचार करना चाहिए कि ये फैसले किसके हक में है। जब आप हिसार में कांग्रेस का विरोध करते हैं तो आपके किसके साथ खड़े नजर आते हैं। क्या स्वर्गीय भजनलाल के परिवार का इतिहास आप नहीं जानते? क्या आप इस बात से परिचित नहीं हैं कि चौटाला परिवार का इतिहास क्या है? क्या आप इस बात से अनजान हैं कि इसके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले कोर्ट में लंबित हैं?

क्या आप और आपके सहयोगी इस बात से अनजान हैं कि कांग्रेस के विरोध में वोट करने का आह्वान करके आप इनके साथ खड़े हुए नजर आ रहे हैं? इससे क्या करप्शन कम होगा? क्या हम साफ0सुधरी राजनीति का समर्थन करेंगे? आप यदि भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग में भ्रष्ट लोगों के साथ लेंगे तो फिर भ्रष्टाचार कैसे कम होगा?

आपको शायद ज्ञात न हो इंदौर में 'मैं हूं अन्ना' की टोपी पहनकर एक मंत्री और एक विधायक ने आपके आंदोलन में हिस्सा लिया। यह दोनों ही जमीनों के सौदों को लेकर अनेक विवादों में घिर रहे हैं। आप स्वयं विचार करें क्या इससे आपके आंदोलन को ताकत मिलती है?

मैंने जब भी आपके आंदोलन के विषय में आरएसएस का नाम लिया है तो आपने मुझे पागलखाने भेजने की बात कही है। मैं आपका सम्मान करता हूं। इसलिए इस विषय में मुझे कुछ नहीं कहना। पर अब तो आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने इस बात को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है। अपने विजयादशमी के भाषण में नागपुर में इस बात को उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है।

इसके पहले गोविंदाचार्य भी इस बात को कह चुके हैं और संघ ने आपके आंदोलन का समर्थन करते हुए अपने स्वयंसेवकों को पत्र भी लिखा है। आप भी जानते हैं कि संघ के प्रवक्ता राम माधव ने आपके मंच पर आकर आप समर्थन किया।

आपके रामलीला मैदान के कार्यक्रम के समापन अवसर पर जब धन्यवाद दिया जा रहा था तो वहां पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी का विशेष उल्लेख किया गया। आप फिर जब कहते हैं कि आपको मालूम नहीं कि संघ ने आपका समर्थन किया कि नहीं तो आपकी विश्वसनीयता पर प्रश्न अवश्य खड़ा होता है।

आप महाराष्ट्र के मूल निवासी हैं और संघ भी महाराष्ट्र की धरती से आगे आया है। मुझे केवल इतना ही कहना है कि उनका चरित्र आप मुझसे बेहतर जानते हैं। मेरा तो केवल एक ही प्रश्न है। आप इतना बड़ा देशव्यापी आंदोलन चला रहे हैं तो क्या आपको पता नहीं है कि कौन से संगठन आपका समर्थन कर रहे हैं और क्या आप इन लोगों का साथ लेकर आगे बढ़ना चाहते हैं?

वैसे यदि आप विचार करेंगे तो आपको इस बात का एहसास होगा कि आप के शुभचिंतक भी आपके आस-पास रहनेवाले लोगों को लेकर आपके विषय में चिंतित हैं। शिव सेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे ने एक मराठी माणुस के नाते आपका आदर और समर्थन किया है। आपके आंदोलन और आपके सहयोगियों के विषय में उनके विचार भी आप भली भांति जानते हैं।

उन्होंने ठीक ही कहा है कि आपके सहयोगी आपको अनशन पर बैठाते हैं और स्वयं 5-स्टार भोजन का आनंद लेते हैं। आपका जीवन समाज सेवा का आदर्श रहा है। मेरे जैसे राजनीतिक कार्यकर्ता इस विषय में आपसे प्रेरणा लेते हैं। आप राजनीति में आते हैं तो आपका स्वागत है पर आप अपने साथी और समर्थक तो ऐसे चुनें कि लोगों का विश्वास न टूटे।

जन चर्चा यह भी है कि भारतीय जनता पार्टी ने अब आपको देश के राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने का सब्जबाग दिखाया है। आप उम्मीदवार बनें पर भारतीय जनता पार्टी के लुभावने वादों से सावधान रहें। इस पार्टी को ऐसे सब्जबाग दिखा कर लोगों को गुमराह करने की आदत है। आपके स्वस्थ और लंबे जीवन की कामना के साथ।

शुभकामनाओं सहित,
आपका
दिग्विजय सिंह

Comments (Leave a Reply)