बंद कमरे में सुनवाई की गुहार, चिदंबरम के खिलाफ सीबीआइ जांच

Published: Tuesday, Oct 11,2011, 14:29 IST
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पी. चिदंबरम, केंद्र सरकार, सर्वोच्च न्यायालय, 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले, ए.राजा, एके गांगुली

नई दिल्ली केंद्र सरकार और सीबीआइ ने सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय में 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में तत्कालीन वित्त मंत्री (वर्तमान गृहमंत्री) पी. चिदंबरम की कथित संलिप्तता को पुरजोर विरोध किया। चिदंबरम के खिलाफ सीबीआइ जांच व निगरानी के लिए विशेषज्ञ पैनल गठित करने संबंधी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दोनों ने दावा किया कि घोटाले में चिदंबरम की कोई भूमिका नही है। उनके खिलाफ कोई मामला नहीं बनता। साथ ही अदालत से यह गुहार भी लगाई कि मामले की सुनवाई बंद कमरे (चैंबर) में की जाए। खुली अदालत में सुनवाई से जांच प्रभावित होती है।

अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जीएस सिंघवी व एके गांगुली की पीठ ने चिदंबरम की भूमिका की सीबीआइ जांच संबंधी सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका और गैरसरकारी संगठन सीपीआइएल की जांच की निगरानी के लिए 2-3 सदस्यों का विशेषज्ञ पैनल गठित करने की अर्जी पर सुनवाई की। इस मामले में सरकार का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता पीपी राव ने कहा, चिदंबरम के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता। रिकार्ड देखने से पता चलता है कि तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए.राजा और तत्कालीन वित्तमंत्री पी. चिदंबरम के बीच 10 जनवरी 2008 के पहले कोई मीटिंग नहीं हुई थी। सारी चर्चा और पत्राचार वित्त सचिव के जरिए वित्त मंत्री तक पहंुचा था और वित्त मंत्री ने उसे देखा था।

सीबीआइ वित्त सचिव के बयान व अन्य दस्तावेजों को देख चुकी है। राव ने कहा कि इस तरह आदेश देने से तंत्र अस्थिर हो जाएगा। सीबीआइ प्रतिष्ठित जांच एजेंसी है उस पर आरोप लगाना गलत है। याचिकाकर्ता आधी-अधूरी जानकारी पर ये मांग कर रहे हैं। कोई भी व्यक्ति या सेवानिवृत्त न्यायाधीश मामले की उतनी अच्छी निगरानी नहीं कर सकता जितनी अच्छी सर्वोच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश कर रहे हैं। सरकार ने कोर्ट से चैंबर में सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि खुली अदालत में सुनवाई से जांच प्रभावित होती है। इस पर पीठ ने कहा कि इससे पहले तो कभी भी सरकार ने चैंबर में सुनवाई की मांग नहीं की थी। कोर्ट ने राव से अपनी मांग के बाबत अर्जी दाखिल करने को कहा। सीबीआइ के वकील केके वेणुगोपाल ने कहा, जांच सही दिशा में चल रही है। अब तक दाखिल की गयी स्थिति रिपोर्ट पर अदालत ने संतोष जताया है। उन्होंने कहा, अदालत को कोई अधिकार नहीं है कि वह जांच एजेंसी को जांच के तरीके और किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ जांच का आदेश दे।

स्वामी और सीपीआइएल के वकील प्रशान्त भूषण ने अपनी मांगों पर जोर दिया। स्वामी ने कहा कि दस्तावेज बताते हैं कि चिदंबरम को पूरी जानकारी थी। वहीं, सीबीआइ ने अदालत को पूर्व संचार मंत्री दयानिधि मारन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और छापे मारने की जानकारी दी। साथ ही सील बंद कवर में जांच की स्थिति रिपोर्ट पेश की।

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