ISI की 'नापाक' चाल, नक्सलियों से मिलाया हाथ, मकसद भारत सरकार का तख्ता पलट

Published: Friday, Oct 07,2011, 21:15 IST
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नई दिल्ली।। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ नक्सलवादियों और मणिपुर के अलगाववादी संगठनों की मिलीभगत का बड़ा खुलासा हुआ है।

लश्कर-ए-तैयबा और कश्मीरी आतंकवादियों का प्रभाव भारत में फैलाने के लिए नक्सलियों और माओवादियों के साथ आईएसआई गठजोड़ कर चुकी है। इनका मकसद देश में अस्थिरता फैलाकर भारत सरकार का तख्ता पलटना है।

यह खुलासा दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की पूछताछ के दौरान मणिपुरी के आतंकवादी संगठन पीएलए (पीपल्स लिबरेशन आर्मी) के दो लोगों ने किया है। स्पेशल सेल के स्पेशल कमिश्नर पी.एन.अग्रवाल के मुताबिक, एन. दिलीप सिंह और अरुण कुमार सिंह को 1 अक्टूबर को पहाड़गंज के एक होटेल से आईबी की सूचना के आधार पर गिरफ्तार किया गया था।

एसीपी भीष्म सिंह की टीम को इन्होंने बताया कि दिलीप ने झारखंड के जंगलों में ट्रेनिंग कैंप के बारे में बातचीत के लिए अरुण को बुलाया था। यह ट्रेनिंग पीएलए के सदस्य नक्सलियों को दे रहे हैं। पीएलए चीन और बर्मा से मिल रहे ग्रेनेड लॉन्चर और बाकी हथियारों को पहुंचाने के अलावा इन्हें चलाने की ट्रेनिंग भी नक्सलियों को दे रहा है।

हथियार चलाने के एवज में उनका संगठन नक्सलियों से रकम लेता है, जबकि इन्हें चलाने की ट्रेनिंग मुफ्त दी जाती है।

पीएलए के दोनों सदस्यों ने पुलिस को बताया कि कश्मीरी आतंकवादी संगठनों के माध्यम से आईएसआई नक्सलियों को हथियार मुहैया करा रही है। नक्सलियों और कश्मीरी आतंकवादी संगठनों में कई बैठकें भी हो चुकी हैं।

आईएसआई नक्सलियों को हथियारों और इन्हें चलाने की ट्रेनिंग के अलावा संचार के साधन भी मुहैया करा रही है। आईएसआई की ओर से उनका एजेंट मदनी बांग्लादेश के रास्ते झारखंड में जाकर नक्सलियों के नेता किशनजी से मिला था। उस बातचीत के बाद किशनजी और लश्कर-ए-तैयबा में गठजोड़ हुआ था।

एन.दिलीप और अरुण सिंह ने बरामद लैपटॉप और सीडी में इन संगठनों की कई योजनाओं के बारे में खुलासा हुआ है। आईएसआई की पहल पर उत्तर-पूर्वी राज्यों के सात आतंकवादी संगठनों से आपस में मिलकर युनाइटेड फ्रंट बना लिया है।

माओवादियों और नक्सलियों को इनके नेता बताते हैं कि हमारा मकसद साल 2050 तक बल प्रयोग से भारत सरकार को गिराना है। हालांकि आईएसआई इन्हें यह टारगेट जल्द हासिल करने की प्रेरणा दे रही है। फिलहाल आईएसआई के एजेंट इन्हें कई राज्यों के जंगलों में गुरिल्ला युद्ध की ट्रेनिंग दे रहे हैं।

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