गरबा डांस में भिड़े चिदम्बरम और प्रणब, डांडिया स्टिक से किया एक दूसरे पर हमला — फेकिंग न्यूज़

Published: Friday, Sep 30,2011, 15:38 IST
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डांडिया स्टिक, प्रणब मुखर्जी,पी चिदम्बरम, कपिल सिब्बल

टूजी मामले पर वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की सफाई को अभी चंद घंटे ही बीते थे कि दोनों कांग्रेसी दिग्गज एक बार फिर आपस में भिड़ गए। और इस बार बात इतनी बढ़ी कि प्रणब मुखर्जी और पी चिदम्बरम ने एक दूसरे पर डांडिया स्टिक से हमला कर दिया, हालांकि इस हमले में कोई घायल नहीं हुआ है मगर जिस तरह सैंकड़ों लोगों की मौजूदगी में ये झगड़ा हुआ, उससे कांग्रेस को भारी शर्मिंदगी का सामना कर पड़ा है।

सूत्रों पर यकीन करें तो शुक्रवार शाम वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की इस सफाई के बाद कि नोट में जो कुछ भी है, वो मेरा नज़रिया नहीं है, पी चिदम्बरम मान गए थे। सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था। पार्टी ने इतने बड़े विवाद के निपटने पर राहत की सांस ली थी। तभी कपिल सिब्बल ने सजेस्ट किया कि क्यों न इस ‘मौके’ को सेलीब्रेट किया जाए।

फिर सवाल उठा क्या किया जाए? हर कोई अपनी तरफ से सलाह देने लगा।  राहुल गांधी का कहना था कि चलो, सभी अपनी-अपनी गाडी पर भट्टा पारसौल चलते हैं। ड्राइव की ड्राइव हो जाएगी और लौटते वक्त किसी के घर खाना खा आएंगे।मनीष तिवारी का कहना था कि राहुल बाबा क्या करेंगे इतनी रात में भट्टा पारसौल जाकर… चलो, सभी बॉडीगार्ड फिल्म देखने चलते हैं। वैसे भी मुझे ऐसी हल्की-फुल्की फिल्में बड़ी अच्छी लगती हैं जिनमें दिमाग न लगाना पड़े।

मनीष अपनी बात कह ही रहे थे कि तभी दिग्विजय बोल पड़े…अरे बॉडीगार्ड देखने राहुल बाबा थिएटर क्यों जाएंगे…मैं क्या मर गया हूं! मैं कहता हूं राहुल बाबा अगर आपको लांग ड्राइव पर ही जाना है तो भट्टा पारसौल क्यों…सीधे आज़मगढ़ चलते हैं। वैसे भी यूपी चुनाव नज़दीक हैं, सुबह लौटते में एक चुनावी सभी को भी संबोधित करते आइएगा।

दिग्विजय, मनीष तिवारी और राहुल गांधी की ये चर्चा चल ही रही थी तभी बगल में खड़े विलासराव देशमुख ने कहा,  राहुल बाबा अगर आप बुरा न मानें तो एक सलाह दूं, नवरात्र के साथ ही गरबे की रौनक पूरे शबाब पर हैं। रात को यहां-वहां जाने के बजाए, क्यों न हम लोग मेरे बंगले में डांडिया के लुत्फ लें।

सुनने के साथ ही राहुल गांधी को आइडिया जंचा और तय हुआ कि प्रणब मुखर्जी और पी चिदम्बरम की ‘सुलह को सेलीब्रेट’ करने सभी विलासराव के बंगले पर जाकर गरबा खेलेंगे। राहुल बाबा की सहमति के बाद दिग्विजय सिंह ने पहले तो इस बात की तारीफ की और फिर जेब से डायरी निकालकर हिट लिस्ट के पन्ने में विलासराव देशमुख का नाम भी जोड़ दिया!
(नोट-दिग्विजय सिंह को ये कतई मंज़ूर नहीं कि उनके होते कोई और राहुल बाबा के आगे नम्बर बना ले!)

बहरहाल, तय कार्यक्रम के मुताबिक रात को सभी डांडिया खेलेने विलासराव देशमुख के बंगले पर पहुंचे। राहुल गांधी के वहां पहुंचते ही लॉन में मौजूद तकरीबन एक दर्जन मंत्री डांडिया खेलने के लिए उनकी तरफ लपके। थोड़ी देर में पी चिदम्बरम और प्रणब मुखर्जी भी वहां आ गए।

चिदम्बरम जहां बेहद खुश दिखाई दे रहे थे तो वहीं प्रणब मुखर्जी के चेहरे पर अब भी तनाव था। तभी हाथ में डांडिया की चार-पांच स्टिक लिए कपिल सिब्बल उनके पास आए और दोनों को साथ में डांडिया खेलने के लिए कहा। शुरू में उन्होंने डांडिया खेलने में आनाकानी की मगर बाद में मान गए।

ये वाकई बेहद मनोरम दृश्य था। कांग्रेस के दो दिग्गज जो कुछ घंटे पहले तक एक दूसरे के खिलाफ तलवारें निकाले थे, अब वही डांडिया स्टिक से स्टिक बजा प्यार का पैगाम दे रहे थे। लग रहा था कि मानों बड़ा संकट टल गया। सब कुछ पहले की तरह सामान्य हो गया है।

मगर पत्रकार का काम होता है…ख़बर के पीछे की ख़बर निकालना…जो दिखाई दे रहा है, उस पर यकीन न करना। और ठीक इसी काम के लिए फ़ेकिंग न्यूज़ संवाददाता भी वहां मौजूदा था। जो दोनों मंत्रियों की बॉडी लैंग्वेज़ पढ़ने की कोशिश कर रहा था। साथ ही ये सुनने की भी कि वो आपस में क्या बातचीत कर रहे हैं।

तभी हमारे संवाददाता ने क्या देखा कि हाथ में डांडिया स्टिक लिए प्रणब दा मुस्कुराते हुए कह रहे हैं कि चिदम्बरम बाबू आप बहुत लंबे हैं…ठीक से डांडिया खेलना है, तो ज़रा नीचे झुकिए…मेरे हाथ आपकी डांडिया स्टिक तक नहीं जा रहे।

इस पर चिदम्बरम बोले अरे दादा, मेरी पीठ में दर्द है, मैं नहीं झुक सकता…आप ज़रा पंजों के बल ऊपर उठने की कोशिश कीजिए।

चिदम्बरम का इतना कहना था कि प्रणब दा भड़क गए और बोले, अरे मैंने पहले ही खुद को काफी स्ट्रैच किया है, मैं और ऊपर नहीं हो सकता…आप ज़रा नीचे झुकिए।इस पर चिदम्बरम ने फिर दोहराया-प्रणब बाबू कहा न…मैं नीचे नहीं झुक सकता…मेरी कमर में दर्द है।

चिदम्बरम का इतना कहना था कि प्रणब दा बुरी तरह भड़क गए और बोले- अजी जाने दीजिए…पीठ दर्द तो बहाना है…दरअसल झुकना आपने सीखा ही नहीं…मुझे देखिए बिना अपनी ग़लती के भी झुका! प्रणब दा ये जवाब सुनकर चिदम्बरम भी आपा खो बैठे…अच्छा, तो ये है आपका असली दर्द…इसका मतलब शाम में आपने जो कुछ कहा…उससे आप ज़रा भी इत्तेफाक नहीं रखते।

इस पर गुस्साए प्रणब बाबू ने भी कह दिया…हां नहीं रखता…मैं पहले भी मानता था और अब भी मानता हूं अगर तुम चाहते तो टू जी घोटाला रूक भी सकता था।

प्रणब दा का ये जवाब सुनकर चिदम्बरम को भी मानों लगा कि बस बहुत हुआ…शब्द व्यर्थ हो गए हैं…भाषा अपना मतलब खो बैठी है…संवाद बेमानी हो गया है…और ऐसा ही कुछ सोचते हुए उन्होंने डांडिया स्टिक को हथियार बनाकर प्रणब बाबू पर तान दिया।

ये देख वहां खडे़ लोगों के होश फाख्ता हो गए…बंगले के भीतर और बाहर भारी हंगामा होने लगा…धड़ाधड़ टीवी चैनल्स की ओबी वैन जुटने लगी…डीजे पर जारी म्यूज़िक का शोर थम गया…हर कोई ये देखकर हैरान था कि दो दिग्गज मंत्री इस तरह से कैसे लड़ सकते हैं…

इस बीच मनीष तिवारी और दिग्विजय सिंह भी आपस में उलझ पडे…मनीष का कहना था कि मैं अच्छा भला कह रहा था कि चलो बॉडीगार्ड फिल्म देखने चलते हैं…फिल्म जाते तो कोई झगड़ा नहीं होता…होता तो बॉडीगार्ड हमें बचा लेता! दिग्विजय का कहना था कि अबे तुम चुप रहो..आज़मगढ़ चलते तो अभी तक सभी गाडी में ही सो चुके होते, कोई झगड़ा नहीं होता।

इस बीच माहौल से हताश-निराश कपिल सिब्बल सिर पर हाथ रखकर बैठे थे…शर्मिंदगी से बचने के लिए प्रधानमंत्री चुपचाप पिछले दरवाज़े से निकल गए और अब तक झगड़े से बेख़बर कोने में बैठे राहुल गांधी डांडिया स्टिक को बांसुरी समझ पिछले दो घंटे से उसे बजाने की कोशिश कर रहे थे!

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