कब तक सरकार देश के शहीदों का अपमान करती रहेगी ? — आई.बी.टी.एल विशेष

Published: Tuesday, Sep 20,2011, 23:10 IST
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भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस, चन्द्र शेखर आज़ाद, अमर शहीद मेजर संदीप उन्नीकृष्णन, मोहनचंद शर्मा

वैसे भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस, चन्द्र शेखर आज़ाद का अपमान तो ये सरकार पिछले ६४ सालो से करती आ रही है... और २६ नवम्बर २००८ के मुंबई हमलो के अमर शहीद मेजर संदीप उन्नीकृष्णन को भी सम्मान न दे सकी, उनके चाचा ने सरकार से शहीदों को सम्मान दिलाने के लाखों प्रयासों के बाद भी निराश ही हाथ लगी एवं उन्होंने ०४ फरवरी २०११ को संसद भवन के बाहर आत्मदाह कर लिया

अपमान किया बाटला हाउस में शहीद हुए मोहनचंद शर्मा का, शहीद शर्मा वही जाबांज पुलिस अफसर हैं जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बगैर बाटला हाउस में अपनी बहादुर टीम के साथ आतंकवादियो पर हमला किया था| ये वो खूंखार आतंकवादी थे जिन्होंने दिल्ली में सीरियल बम ब्लास्ट किए थे और भारी तबाही मचाई थी.

वही दूसरी ओर जब इन आतंकवादियो को मारा गिराया अन्य साथियो को गिरफ्तार किया गया तो इन आतंकियों से मिली जानकारी एवं दस्तावेजों के आधार पर गुजरात, मुंबई, दिल्ली में जितनी भी आतंकी घटनाएं हुई उनमें शामिल अपराधियों तक तक पहुंचा जा सका| उनके गुप्त ठिकानों की जानकारी मिली एवं विभिन क्षेत्रों से अनेकों आतंकियों की गिरफ्तारी संभव हुई| अगर एक तरह से कहा जाए तो शहीद मोहनचंद शर्मा जी ने अपना बलिदान देकर देश में पनप रहे इस्लामिक आतंकवाद की कमर तोड़ कर रख दी थी| लेकिन शहीद मोहनचंद शर्मा जी के बलिदान पर राष्ट्रविरोधी तत्वों द्वारा हमेशा से उंगलिया उठती रही है, कभी तो एनकाउंटर को फर्जी करार दिया गया तो कभी मारे गये और गिरफ्तार हुए आतंकवादियो को मासूम और बेगुनाह बच्चे बता कर शहीद की शहादत का अपमान किया गया|

बार-बार राष्ट्र द्रोहियो द्वारा मोहनचंद शर्मा जी की शहादत का अपमान किया गया, कभी जामिया के वाइस चांसलर द्वारा, तो कभी वहां के लोगों ने दिल्ली पुलिस की राष्ट्रवादी कार्यप्रणाली पर भी उंगलिया उठाई|

कल १९ सितम्बर को उनके बलिदान की तीसरी पुण्यतिथि पर राष्ट्रवादी संघठनो ने एक जुट हो कर उनको श्रदांजलि अर्पित करने का कार्यक्रम रखा था... वहां उपस्तिथ पुलिस ने पूर्ण समर्थन दिया, कार्यक्रम के अनुसार होली फॅमिली हॉस्पिटल से बाटला हाउस तक मार्च निकालना था... जिसे पुलिस ने समुदाय विशेष के विरोध के कारण हॉस्पिटल के चौक तक ही रोक दिया... राष्ट्रवादियों ने उस चौक का नामकरण शहीद मोहनचंद शर्मा जी के नाम पर किया परन्तु राष्ट्रवादियों के वहाँ से हटते ही पुलिस ने समुदाय विशेष के दवाब में शहीद मोहनचंद शर्मा जी का नाम हटा दिया|

बाद में पुलिस ने वहाँ कागज़ पर नाम लिखने का सुझाव दिया ओर MCD का बहाना देने लगी... राष्ट्रभक्तो ने बोर्ड पर शहीद मोहनचंद शर्मा जी का नाम कागज़ पर लिख कर लगा दिया और जब वहा पुन: नाम लिखने की कोशिश की गयी तो पुलिस ने सभो को गिरफ्तार कर लिया

श्रदांजलि में सम्मलित संघठनो "भगत सिंह क्रांति सेना", "प्रत्यंचा", "हिन्दू संघर्ष समिति" ने MCD में इसकी लिखित जानकारी दी है और उस चौक का नाम शहीद मोहनचंद शर्मा जी के नाम पर रखने की मांग की है पर क्या आज़ाद भारत में एक शहीद का नाम लिखने के लिए किसी अनुमति की जरुरत होना चाहिए, वहीँ दूसरी ओर अरुंधती राय, गिलानी जैसे लोग पुलिस सुरक्षा में देश को खंडित करने का संकल्प लेते है और देश को टुकडो में बाटने के लिए सेमिनार करते हैं

- तरुण अग्रवाल (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार है)

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