चाइना बाजार के रूप में तब्दील हुआ सदर बाजार, 50 फीसदी हिस्से में चीनी वस्तुओं का कब्जा

Published: Saturday, Sep 24,2011, 16:21 IST
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सुधीर कुमार, नई दिल्ली देश के महत्वपूर्ण व्यवसायिक स्थलों में से एक सदर बाजार चाइना बाजार में तब्दील हो गया है। चीन से आयातित सामानों का यह भारतीय हब बन गया है। इस बाजार से न केवल दिल्ली, बल्कि देश के कई हिस्सों में सामानों की आपूर्ति की जाती है। इस बाजार के 50 फीसदी हिस्से में चीनी वस्तुओं का कब्जा है। चीन के बढ़ते दबदबे का ही कमाल है कि यहां के व्यापारियों का चीन जाना आम हो गया है।

कारोबारी चीन की व्यापारिक नीतियों से अभिभूत नजर आते हैं। करीब छह वर्ष पहले तक यहां व्याप्त असुविधाओं के कारण सदर बाजार बाजार का रूतबा घटने लगा था। बाजार में खरीदारों की कमी होने लगी थी। लेकिन उसी दौरान चीनी सामानों का आयात शुरू हुआ। इसने यहां के बाजार में जान डाल दी। अब तो हालत यह है कि यहां बिकने वाला कोई ऐसा सामान नहीं बचा जो चीन से न आ रहा हो। यही वजह है कि यहां यह जुमला आम हो गया है कि सुई से लेकर हवाई जहाज तक चीन से ही आ रहा है।

यहां के बाजारों में घूमने के बाद तो एकबारगी ऐसा लगता है कि पूरा बाजार ही चीन के माल से अटा पड़ा है। मोबाइल व खिलौनों में तो चीन का दबदबा पहले से ही है। अब बेल्ट, सजावटी सामान, बिजली के उपकरण, मूर्तियां, टेलरिंग मेटेरियल, गुब्बारे, आर्टिफिशियल ज्वेलरी और स्टेशनरी पर भी चीन का कब्जा हो गया है।

फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन के वाइस चेयरमैन परमजीत सिंह पम्मा कहते हैं कि इनके अलावा फर्नीचर, छाता, क्राकरी, जूता, बैटरी, घड़ी, सजावटी फ्लावर के अलावा टॉफी तक चीन से आ रही हैं। फेडरेशन के अध्यक्ष पवन कुमार कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि सदर बाजार पूरी तरह से चीन के माल पर निर्भर है। यहां भारतीय उत्पाद भी बहुतायत में मिलते हैं।

यह जरूर है कि सदर बाजार 50 फीसदी तक चीनी सामानों पर आधारित हो गया है। वह कहते हैं कि एक तो आयात के बाद भी चीन का माल भारतीय उत्पादों से 20 से 30 फीसदी तक सस्ता है। कुछ मामलों में यह प्रतिशत और भी ज्यादा है। इसके अलावा वहां के माल की क्वालिटी भारतीय उत्पादों से अच्छी है। जब उनसे पूछा गया कि क्या चीन के सामान की क्वालिटी घटिया है? वह कहते हैं कि जो कारोबारी वहां से घटिया सामान लाते हैं वही खराब होता है।

कई कारोबारी वहां से रिजेक्ट माल भी ले आते हैं। कुमार कहते हैं कि चीन की व्यापारिक नीतियों की वजह से वहां का माल सस्ता है। चीन सरकार व्यापारियों के प्रति दोस्ताना व्यवहार रखती है। उन पर करों का बोझ नहीं है। इसके उलट भारत सरकार का व्यापार के प्रति रूख उदासीन है। यहां के कारोबारी और उत्पादनकर्ता दर्जनों करों के बोझ तले दबे हैं। एक व्यापारी कहते हैं कि एक शर्ट बनाने में भारत में धागे से लेकर, बटन, कपड़ा, टेलरिंग मैटेरियल, पैकेजिंग के साथ-साथ तैयार माल पर भी कई तरह का टैक्स देना पड़ता है। चीन में ऐसा नहीं है।

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