एनआईएस में धूल फांक रही हैं करोड़ों की साइकिलें : राष्ट्रमंडल खेल

Published: Wednesday, Sep 28,2011, 20:08 IST
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राष्ट्रमंडल खेलों से पहले विदेश से मंगाई गईं करोड़ों रूपये की साइकिलें पटियाला के एनआईएस में धूल फांक रही हैं.
दो अलग-अलग साइकिलिंग महासंघों के बीच जारी आरोप प्रत्यारोप और विवादों के बीच भारत के साइकिलिस्ट पिस रहे हैं.

नयी दिल्ली में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2010 और फिर चीन के ग्वांग्झू में एशियाई खेलों में भारतीय साइकिलिस्टों ने पिछले साल लंदन से मंगाई गई साइकिलों के साथ भाग लिया था और दावे किये गये थे कि ये साइकिलें भारत में साइकिलिंग का स्तर बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगी.

इसके बाद से ये करोड़ों की साइकिलें और उनके साथ इनका तकनीकी सामान पटियाला स्थित भारतीय क्रीड़ा संस्था (एनआईएस) में धूल फांक रहा है.

एनआईएस के भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) अधिकारियों का कहना है कि दो महासंघों के बीच विवाद चल रहा है और इनका मामला अदालत में लंबित है, किसी को भी आंखें बंद करके ये करोड़ों की साइकिलें नहीं दी जा सकती.

ब्रिटेन की कंपनी 'डोलन' द्वारा तैयार 46 साइकिलें राष्ट्रमंडल खेलों से ठीक पहले भारत आयीं थीं जिसमें 28 ट्रैक साइकिलें, 12 रोड बाइक्स और छह टाइम ट्रायल बाइक्स शामिल थीं. ये साइकिलें अंतरराष्ट्रीय स्तर की हैं और एक एक साइकिल की कीमत लाखों रूपये की है.

साइ के एक अधिकारी ने बताया, 'ये साइकिलें साइ की संपत्ति हैं. देश में साइकिलिंग के दो महासंघ हो गये हैं जिनका मामला अदालत में है. जब तक व्यवस्थित तरीके से हमारे पास आग्रह नहीं आता, हम ये साइकिलें नहीं दे सकते.

दरअसल, सुखदेव सिंह ढींढसा के इस्तीफे के बाद उनके बेटे परमिंदर सिंह की अध्यक्षता में एक साइकिलिंग महासंघ बना है जिसने बैंकाक में 10 से 11 सितंबर तक एशिया कप में भाग लेने के लिए अपनी टीम भेजी थी लेकिन इस दौरान साइकिलिस्टों ने अपने खर्चे से खरीदी गईं साइकिलों से ही टूर्नामेंट में भाग लिया.

केरल के रहने वाले ए सराफ के नेतृत्व में एक अन्य साइकिलिंग महासंघ है जिसका दावा है कि खेल मंत्रालय ने उन्हें मान्यता दे रखी है. इस महासंघ ने जम्मू में बाइकिंग टूर्नामेंट आयोजित किया लेकिन अनुरोध के बावजूद उन्हें भी विदेश से मंगाई गईं करोड़ों की साइकिलों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं मिली.

परमिंदर वाले साइकिलिंग महासंघ के महासचिव ओंकार सिंह ने कहा, 'हमने नये सिरे से चुनाव कराए हैं जिसमें आईओए पर्यवेक्षक और उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश मौजूद थे लेकिन हमें फिर भी सबकुछ अपने खर्चे पर करना पड़ रहा है.

उन्होंने कहा, 'बैंकाक में एशिया कप के दौरान भी साइकिलिस्टों ने अपनी अपनी साइकिलों से ही भाग लिया.

उधर, ए सराफ ने कहा, 'हमने साइ को पत्र लिखकर कहा था कि भारत में साइकिलिस्टों को बढावा देने के लिए पूरी तरह से सहयोग दिया जाए लेकिन हमें भी जम्मू में साइकिलिंग टूर्नामेंट के लिए साइकिलें नहीं दी गईं.

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