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  • के. एन. गोविन्दाचार्य
  • वैकल्पिक राजनिति की दिशा क्या हो?

    Saturday, Mar 02,2013, 17:30 IST .

    देश भीषण परिस्थितियों से घिरता जा रहा है। राजनैतिक दलों, राजनेताओं, नौकरशाहों और थैलीशाहों ने लोकतंत्र को लूटतंत्र में बदल दिया है। भ्रष्टाचार ने सारी सीमायें लांघ दी हैं। देश में कानून का राज सिमटता जा रहा है, और अपराधियों में कानून का डर समाप्त हो गया है। आम जनता पर गरीबी, बेकारी और महंगार्इ की मार बढ़ती जा रही है। भारत में सत्ता के नकारेपन का नतीजा है कि विदेशी ताकतें इस देश की राजनीति और ..

  • केन्द्र सरकार और प्रधानमंत्री को दुर्बल पाकर विदेशी ताकतें अपना स्वार्थ साधने का प्रयत्न करने लगी हैं

    Saturday, Aug 04,2012, 22:56 IST .

    अमेरिकी राष्ट्रपति श्री बराक ओबामा द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापार नीति पर तीखी टिप्पणी से फिर एक बार विदेशी निवेश का मसला गरम हो गया है। अमेरिकी और ब्रितानी समाचार पत्रा-पत्रिकाओं में श्री मनमोहन सिंह को कमजोर प्रधानमंत्री चित्रित किया जा रहा है। कहीं यह सब सोची समझी रणनीति तो नहीं ऐसी आशंका पैदा हो गई है। वैश्विक आर्थिक संकट तथा सत्ताधरी कांग्रेस दल के आंतरिक कारणों से श्री मनमोहन सिं..

  • गंगा बचेगी, तभी हम बचेंगे - के. एन. गोविन्दाचार्य

    Tuesday, Jul 24,2012, 16:15 IST .

    भारत के पौराणिक साहित्य से लेकर यहां की लोककथाओं तक में ऐसे कई प्रसंग मिल जाएंगे, जिसमें गंगा की अविरल धारा को उसी तरह त्रिकाल सत्य माना गया है, जैसे सूर्य और चंद्रमा को। लोग गंगा की धारा को अटूट सत्य मानकर कसमें खाते थे, आशीर्वाद देते थे। विवाह के समय मांगलिक गीतों में गाया जाता था, ‘जब तक गंग जमुन की धारा अविचल रहे सुहाग तुम्हारा।’ क्या आज इस गीत का कोई औचित्य रह गया है?
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  • इतिहास का सच और भविष्य की चुनौती है अखंड भारत भाग २ - के. एन. गोविन्दाचार्य

    Monday, Oct 24,2011, 10:54 IST .

    प्रश्न : आपने कहा कि अखंड भारत एक सांस्कृतिक सत्य है यानी यह भूभाग यदि अखंड था तो संस्कृति के कारण। आज वह संस्कृति जब वर्तमान भारत में ही कमजोर पड़ रही है तो जिन स्थानों से वह लुप्त हो गई है, वहां अपना प्रभाव कैसे फैला पाएगी?

    उत्तर : यहां फिर गलती हो रही है। वास्तव में समाज का भूसांस्कृतिक पक्ष अंतरतम में रहता है और अपना असर करता रहता है। समाज का भूरा..

  • इतिहास का सच और भविष्य की चुनौती है अखंड भारत - के. एन. गोविन्दाचार्य

    Friday, Oct 21,2011, 23:32 IST .

    गत कुछ दिनों से अखंड भारत पर देश भर में काफी चर्चाएं हो रही हैं। इन चर्चाओं में अखंड भारत की व्यावहारिकता, वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता, इसके राजनैतिक स्वरूप, दक्षिण एशिया महासंघ बनाम अखंड भारत जैसे अनेक प्रश्न और बिन्दु सामने आए। इन्हीं प्रश्नों को लेकर भारतीय पक्ष के कार्यकारी संपादक रवि शंकर ने विख्यात विचारक श्री गोविन्दाचार्य से बातचीत की। प्रस्तुत हैं उसके मुख्य अंश।

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