राहत शिविरों में पहुंचाये गये 20 गांवों के 7500 लोग

Published: Saturday, Aug 27,2011, 19:30 IST
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शिविरों , मजिस्ट्रेट सदर , एसडीएम अग्रवाल, प्रशासन

बारिश रूक जाने के बाद भी गंगा के पानी के स्तर में कमी नहीं आई है और यह खतरे के निशान से उपर बह रही है जिसके कारण आज सुबह तक गंगा के किनारे बसे 20 गांवो के 7500 से अधिक लोगो को उनके गांवों से निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर बने राहत शिविरों में पहुंचाया जा चुका है।

जिला प्रशासन ने राहत शिविरों में पर्याप्त इंतजाम किये हैं लेकिन इसके बावजूद वहां लोग मौसमी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। कुछ राहत शिविरों में गंदगी और बदइंतजामी की शिकायत भी मिली है लेकिन जिला प्रशासन के अधिकारी इस बात से इंकार कर रहे है। प्रशासन का कहना है कि गंगा में अगर पानी का स्तर अभी स्थिर है लेकिन अगर यह स्तर बढ़ा तो जल्द ही कई और गांव खाली कराने  पड़ेंगे तथा वहां के परिवारों को निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना होगा ।

उप-जिला मजिस्ट्रेट सदर (एसडीएम) और शहर में गंगा और बाढ़ का काम देख रही सौम्या अग्रवाल ने आज बताया कि आज सुबह गंगा नदी का स्तर शुक्लागंज में 113 प्वाइंट 6 मीटर था जबकि गंगा बैराज पर गंगा का यह जल स्तर बढ़कर 115 प्वाइंट 53 मीटर तक पहुंच गया जो खतरे के निशान 113 मीटर से काफी उपर पहुंच  गया है। एक अच्छी बात यह है कि गंगा नदी का का यह स्तर कल से आज तक स्थिर है । गंगा में बढ़ते पानी के कारण गंगा नदी के किनारे बसे गांवो में पानी भरने लगा था और लोग अपने घरों में कैद होकर रहे गये थे।

एसडीएम अग्रवाल ने बताया कि गंगा नदी में बढ़ रहे पानी और गांवो में ग्रामीणों के फंसे होने की खबरो के बाद जिला प्रशासन ने अब तक गंगा के किनारे बसे 20 गांवो के करीब 7500 लोगो को नाव आदि के जरिये इन गांवो से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर बनाये गये राहत शिविरों में पहुंचा दिया है। गंगा किनारे बसे इन गांवो में नदी का पानी लोगो के घरों और खेतों में घुस गया है और गांव को जोड़ने वाली सभी सड़कें पूरी तरह से पानी में डूब गयी है।

उन्होंने बताया कि राहत शिविरों में पनाह लेने वाले परिवारों को प्रशासन की ओर से तिरपाल दिया गया है तथा इनके लिये दोनो समय के खाने के इंतजाम में स्वंयसेवी संस्थाओं को लगाया गया है। जिला प्रशासन के कर्मचारियों की टीमें यहां लगी हुई है । इसके अतिरिक्त डाक्टरों की टीमें भी चौबीसों घंटे इन पर नजर रख रही है।

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