अश्लील साहित्य छाप व बेच कर पैसा बना रहा है चर्च

Published: Thursday, Nov 03,2011, 13:33 IST
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बात ऐसी है कि ईसामसीह सुन लें, तो रो पड़ें | जर्मनी के सबसे बड़े प्रकाशकों में से एक है वेटबिल्ड | यह कम्पनी शत प्रतिशत जर्मनी के कैथोलिक चर्च के अधिकार में है | इस कम्पनी के ऑनलाइन कैटालौग में ढाई हज़ार से अधिक उत्तेजक उपन्यास उपलब्ध हैं | कम्पनी ३० साल पुरानी है और आज इसका व्यापार लगभग ढाई अरब डॉलर का है, ६४०० कर्मचारी हैं और बाजार में २०% की भागेदारी है | अमेज़न के बाद ये दूसरा सबसे बड़ा ऑनलाइन वितरक है जिसके २ करोड़ उपभोक्ता हैं | खुले रूप से तो अश्लीलता को स्पष्ट मनाही है परन्तु उनके कैटालौग में अक्सर अश्लील साहित्य मिल जाता है | ब्लू पैंथर नामक अश्लील साहित्य छापने वाले प्रक्षकों कि भी पुस्तकें उनके पास उपलब्ध हैं और वे उसका विक्रय करते हैं |

जर्मनी के ही एक राष्ट्रीय समाचार पत्र ने इस आशय का समाचार प्रकाशित किया है | पत्र लिखता है कि ३० वर्ष पुरानी इस कम्पनी के विरुद्ध लोग १० वर्षों से विरोध प्रकट कर रहे हैं | चर्च के बिशप आदि को पत्र भी लिखे गए | २००८ में इस सम्बन्ध में ७० पृष्ठों की विस्तृत आख्या बना के बिशप्स को भेजी गयी थी परन्तु आधे से अधिक बिशप्स ने इसके न मिलने की बात कह कर पल्ला झाड़ लिया |   म्यूनिख के अर्कडायोसेज की प्रतिक्रिया भी प्रतिकूल रही | आर्कबिशप के आर्थिक निदेशक ने कह दिया कि हर छोटी छोटी बुराई नहीं मिटाई जा सकती |

सच्चाई यह है कि चर्च ने इस कम्पनी में अब तक १८ करोड़ यूरो से अधिक निवेश किया है | ३० सालों से चले आ रहे पैसे और सत्ता के इस खेल में नग्नता और अश्लीलता का समावेश पुरानी बात है और यह चर्च के धार्मिक उत्तरदायित्वों के इतर ही रहा है | वस्तुतः चर्च ने स्वयं बढ़ चढ़ कर इस कम्पनी को प्रोत्साहन दिया |

यह कलंक कथा यही तक सीमित नहीं है | चर्च ने १९९८ में एक अधिग्रहण किया और द्रोएमेर कनौर नामक कम्पनी में ५० प्रतिशत की भागीदारी अर्जित कर ली | यह कम्पनी सामान्य साहित्य के साथ साथ नितांत अश्लील साहित्य का भी प्रकाशन करती है | इस प्रकार पहले केवल अश्लील साहित्य बेचता आ रहा चर्च १९९८ से अश्लीलता का प्रकाशक और उत्पादक भी बन गया है |  कुछ अश्लील जर्मन पुस्तकें जिनका प्रकाशन चर्च के अधिकार वाले प्रकाशन  संस्थान ने किया है, उनके नाम (हिंदी में अनुवादित) हैं - पाप के खेल, विशेषज्ञों का सेक्स, सेक्स की देवी का ग्रन्थ, अश्लील कथाएँ, शील मर्दक, बोल वेश्या आदि ..

आश्चर्य और वितृष्णा की बात है नैतिकता का पाठ संसार को पढ़ाने वाले और स्वयं को ईश्वर और धर्म के प्रतिनिधि बतलाने वाले इतने निंदनीय कार्य में आकंठ डूबे हैं | धार्मिक ईसाई क्रोधित और विस्मित हैं |  १० वर्ष से चली आ रहा उनका विरोध निष्फल रहा है | चर्च की मर्यादा तार तार हो रही है | शायद ईसामसीह रो रहे हैं |

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