70 के दशक में चीन बनाना चाहा तो 80 के दशक में अमेरिका और 2010 के बाद ब्राजील बनाने की ख्वाहिश

Published: Wednesday, Jun 20,2012, 11:56 IST
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17 मई, 2012 को कोटा (राजस्थान) के घोड़े वाले बाबा चैराहा स्थित टीलेश्वर महादेव मंदिर के सभागार में राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन का आठवां स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया गया। दो दिन चले इस कार्यक्रम में आंदोलन के संस्थापक- संरक्षक के.एन. गोविंदाचार्य मुख्य वक्ता थे।
 
17 मई का दिन राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के लिए विशेष महत्व रखता है। कारण, इस दिन आंदोलन की नींव रखी गई थी। 17 मई, 2012 को कोटा (राजस्थान) के घोड़े वाले बाबा चैराहा स्थित टीलेश्वर महादेव मंदिर के सभागार में राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन का आठवां स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया गया। दो दिन चले इस कार्यक्रम में आंदोलन के संस्थापक- संरक्षक के.एन. गोविंदाचार्य मुख्य वक्ता थे। उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत पर सदियों से बाहरी सभ्यताएं हावी रही हैं। इसी लिए देश सही मायनों में तरक्की नहीं कर पाया है। यहां के नेताओं पर पहले रूस हावी रहा तो उन्होंने भारत को रूस बनाना चाहा, फिर 70 के दशक में चीन बनाना चाहा तो 80 के दशक में अमेरिका और 2010 के बाद ब्राजील बनाने की ख्वाहिश रखते हैं। भारत की शक्ति समाज और परिवारों में है। जब समाज आगे होगा और सत्ता पीछे, तभी देश का विकास होगा।

सरकार पर दूसरे देशों की नकल करने पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया का हर देश अलग है। ईश्वर ने हर देश को अलग प्रश्न पत्र दिया है। हमें इतिहास का प्रश्न पत्र दिया है। हम इसमें भूगोल की नकल करेंगे तो एक भी सवाल हल नहीं कर पाएंगे। अपनी समस्याओं के हल हमें खुद निकालने होंगे। दूसरे देशों की पृष्ठभूमि जाने बिना नकल करना खतरनाक हो रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की आबादी तीस करोड़ है। वहां 120 करोड़ क्रेडिट कार्ड हैं। 12 लाख किसान हैं। जबकि भारत में 65 करोड़ किसान हैं। हमारी आबादी 120 करोड़ है। वहां के फैसले यहां कैसे लागू हो सकते हैं? दूसरों की तरफ देखना और दूसरों की कमी निकालना हमारी आदत सी बन गई है। आजादी से पहले हम हर बात के लिए अंग्रेजों को जिम्मेदार ठहरा देते थे, लेकिन आजादी के बाद हमारे पास काफी समय था, हमने इसे क्यों नहीं बदला? जबकि दुबई जैसे देश ने अपनी जरूरतों के हिसाब से सब कुछ बदल दिया। हमारे यहां हर चीज वही है, जो अंग्रेज देकर गये थे। वही रविवार की छुट्टी, वही दफ्तरों का समय।

गोविंदाचार्य ने सरकार को कटघरे में लाते हुए कहा कि राज्यसभा में राज्य के लोग ही मनोनीत हो सकते हैं, न कि बाहर के। हमें अपनी गरिमा का कुछ तो लिहाज रखना चाहिए। आज घोटाले और भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं, जिससे पता चलता है कि संसद में अपराधी मौजूद हैं। सवाल यह है कि वह वहां तक पहुंचे कैसे? यानी हमारी चुनाव प्रणाली में ही दोष है। इसे सुधारना होगा।
कार्यक्रम में मीनाक्षी लेखी, अनिल हेगड़े, बाबा निरंजन नाथ, अरविंद त्रिवेद्वी, रोशन लाल अग्रवाल, रमाकांत पांडेय, गिरिराज गुप्ता, राकेश दुबे आदि ने भी विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिया। वहीं गांधीवादी विचारक बालकृष्ण निलोसे को शरद कुमार साधक पुरस्कार और समाजसेवी विष्णु दत्त शर्मा को नानाजी देशमुख पुरस्कार से नवाजा गया। कार्यक्रम में सर्वसम्मति से सुरेन्द्र बिष्ट को राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी दी गई।

भारतीय पक्ष

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