अर्धरात्रि १२ बजकर ०५ मिनट : भोपाल गैस त्रासदी पर कुछ पंक्तियाँ

Published: Saturday, Dec 03,2011, 11:06 IST
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भोपाल गैस त्रासदी, बाबा धरणीधर , Bhopal Gas tragedy, Anderson, IBTL

हर जिस्म जहर हो गया एक दिन
मुर्दों का शहर हो गया भोपाल एक दिन

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सर्दी की रात थी वो क़यामत की रात थी
दोजख की आग थी वो भयानक सी रात थी
जो भी हो मगर ये भी एक बात थी
कि तहजीबो तरक्की के गिलाजत की रात थी

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मासूम कोई चीखता अम्मी मुझे बचा
मरती बहन भी टेरती भैय्या मुझे उठा
कहता था कोई आँख से आंसू बहा बहा
मरते दफा तो बाप को बेटा खुदा दिखा

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फर्क था न लाश को जात पांत का
नस्ल रंग आज सब साथ साथ था
हिंदू का हाथ थामते मुस्लिम का हाथ था
जां जहाँ था मौत के हाथ था

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देखा गया न जो कभी सोचा गया
नहीं दर्द को भी पी गई भोपाल की जमीं
खुदा करे ये हादसा गुजरे न अब कहीं
शायद ही अगली पीढियां इसपे करे यकीं

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हर जर्रा शरर हो गया भोपाल एक दिन
मुर्दों का शहर हो गया भोपाल एक दिन

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बाबा धरणीधर जी की मशहूर कविता से चुनिदा पंक्तियाँ ... (आभार)

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