'टोपी' प्रकरण ने साबित कर दिया कि 'सेकुलर' लोग गंदगी में लोटने वाले कीड़े हैं

Published: Monday, Sep 19,2011, 22:52 IST
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उदयपुर, मशहूर सेकुलर, एक्टर, दिलीप कुमार, युसूफ खान, मेवाड़ी पगड़ी, महाराणा प्रताप

नरेन्द्र मोदी ने एक इमाम की दी हुई जालीदार टोपी स्वीकार नहीं की तो मानो देश एक गम्भीर समस्या से जूझने लगा…। सरकारी भाण्ड चैनलों पर जो "सेकुलर कीड़े" बिलबिला रहे थे, शायद अब उन्हें संतुष्ट करने के लिए यानी हिन्दुओं को स्वयं को सेकुलर साबित करने के लिए बुर्का धारण करना होगा, क्रास पहनना होगा…। 


१९९८ में उदयपुर में मशहूर सेकुलर एक्टर दिलीप कुमार (युसूफ खान) ने मेवाड़ी पगड़ी पहनने से इनकार कर दिया था. हालांकि वह किसी पंडित, पुजारी या हिन्दू संगठन ने नहीं पहनाई थी. लेकिन दिलीप साहब को उस पगड़ी में महाराणा प्रताप की देशभक्ति की बू आ रही थी, जिसने अकबर को उसकी नानी याद दिला दी थी. और दिलीप कुमार ये कैसे सहन कर सकता है…

एक तरफ तो मुसलमान हिन्दू प्रतीकों को छोड़ो, "भारतीय प्रतीकों" से भी नफ़रत करते हैं, वहीं दूसरी तरफ मुसलमान और उनके सेकुलर चमचे पूरे दुनिया की 'मुसलमानी' करने पे तुले हुए हैं...इसे कहते हैं सेकुलरिज्म…। क्या अजमेर की दरगाह पर मत्था टेकने वाले घटिया अभिनेताओं/नेताओं की कौम, यह बताएगी कि वैष्णो देवी या अमरनाथ के दर्शन करने जाने वालों में कितने मुस्लिम अभिनेता या नेता हैं?

न जाने कितनी फ़िल्मों में आपने देखा होगा कि "हिन्दू नामधारी हीरो-हीरोइन" भागकर शादी करने अथवा संकट आने पर चर्च जाते हैं या सीने पर क्रास बनाते हैं… कितनी बार आपने मुस्लिम या ईसाई नामधारी हीरो-हीरोइन को फ़िल्म में मन्दिर में पूजा करते देखा है? शायद एक भी नहीं… क्योंकि सिर्फ़ हिन्दू पर ही यह साबित करने की जिम्मेदारी होती है कि वह "सेकुलर" है, बाकियों पर यह नियम लागू नहीं होता…।

"वन्देमातरम" और "सरस्वती वन्दना" का विरोध करने वालों पर मेहरबानी करते, दो कौड़ी की मानसिकता वाले सेकुलर, इस देश के सबसे गन्दे कीड़े हैं…

— सुरेश चिपलूनकर

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